Friday, October 8, 2010

(२)

आप तो मुझे मनाने आते हज़ार बार

इस दिल का क्या करूँ आप पे आ जाता है बार बार
न सताने का वादा याद था बदगुमाँ को
फिर भी हँस के बोले सता लेने दो आखिरी बार
सुना है वो सितमगर आज फिर रूठा है
देखूं मनाऊं उसे फिर से एक बार
कहाँ गए वो शख्श जिन्हें पास था दिल की मजबूरियों का
उनकी दिल्लगी ठहरी और हम छोड़ आये अपना घर-बार
उस शोख को आते हैं रूठ जाने के बहाने हज़ार
मेरी सादगी देख हर बार मनाता हूँ जैसे रूठे हों पहली बार

(3)

मेरे साथ रह गया
या मुझे तनहा कर गया
फैसला तेरे हाथ है
अब तू ही बता ये क्या कर गया

लोग ताउम्र भटका किये
उसके निशाँ-ए-पा के वास्ते
मेरे साथ दो कदम चला
और मुझे मंजिल के पार कर गया

दिल के सौदे में तू मेरे नफे की न पूछ
एक रात ठहरा था चाँद मेरी ज़मीन पे
और मुझे उम्र भर के लिए
मालामाल कर गया

बहुत सुनते थे उसकी दरियादिली
उसपे जाहिर भी थी मेरी तिश्नालबी
फिर साकी मेरे प्याले को
क्यूँ इतना कम भर गया

मेरे साथ रह गया
या मुझे तनहा कर गया
फैसला तेरे हाथ है
अब तू ही बता ये क्या कर गया .

(४)

वो मेरा था फिर क्यूँ
अजनबी सा गुजर गया
नहीं कोई गिला उससे
बस आज से वो मुझे अपना न लिखे

यूँ ही नहीं अहले-शहर को
याद अब तक
अपने कशीदे.. उसके नाम
हमने कहाँ कहाँ न लिखे

कभी उसकी रुसवाई का
सबब न बन जाएँ
बस ये सोच सोच जिंदगी भर
उसे खत न लिखे

सीना-सिपर था वो फिर क्यूँ
अपने ही आंसुओं में डूब के मर गया
खुदा किसी को पानी की
ऐसी मौत न लिखे


(५)

वादा है आँखें तुम्हारी
खुशियों से रोशन होंगी
मैं चिराग जलाता हूँ
तुम नज़र मिलाओ तो सही

तुम्हारी राह के तमाम कांटे
समेट लाये हैं
लो फ़ैल गयी मेरी बाहें
तुम एक कदम आओ तो सही

तुम्हारे दामन में बहार के
फूल ही फूल होंगे
मैं दुआ में हाथ उठाता हूँ
तुम एक बार मुस्कराओ तो सही

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