Thursday, September 27, 2012


मुहब्बत की है तो शिकायत कैसी ?

शिकायत की है तो मुहब्बत कैसी ?

 

मुहब्बत नहीं तो शिकायत कैसी !

शिकायत नहीं तो मुहब्बत कैसी !

Wednesday, September 19, 2012


कब ये मुहब्बत  करने की बेबसी जायेगी

यारो ! जाते जाते ही होटों से हँसी जायेगी

एक घड़ी को देखा था मैंने उन्हें ख्वाब में

ज़िंदग़ी भर न इन आंखों की मदहोशी जायेगी

 

हास्य

कनस्तर भर भर शक्तिप्रास खाया है

तब कहीं जाकर ये होश आया है

सब फिज़ूल, सब पैसा जाया है

किसी को न आनी थी, न आई

बेचने वाले को सारी शक्ति सारा पैसा आया है

 

मुझे पहले से ही था ये धड़का

फिर भी बाल्टी भर भर डेडोरेंट छिड़का

पता नहीं क्या कमी, कहाँ ग़लतियां हो गयीं

लड़की तो एक नहीं आई, मक्खियाँ-मक्खियाँ हो गईं

Thursday, September 13, 2012


यक़ीनन वो तुम्हारा खत रहा होगा 

रक़ीब ने आंखों से लगा कर चूमा था उसे

Friday, September 7, 2012

नाम बदलने से भला 
कहीं नसीब बदले हैं आजतक
हाँ नसीब बदलते ही 
नाम जरूर बदल जाते हैं

Sunday, September 2, 2012


बदले तो बदले पर कोई

ऐसे भी न बदले

कि रिश्ते  नज़र आने लगें बदले-बदले

बदले तो जब जी चाहे बदले कभी घर, कभी गली, कभी शहर

पर भला कोई यूँ भी न बदले कि

अपने चाहने वालों से लेने लगें यूं  बदले

भले चंदा बदले, सूरज बदले

बदले मेरी बला से दुनियां बदले

हम तो वसीयत में लिख चले

लाख ज़माने कहां से कहां बदले

बदले तो न बदले एक मेरे महबूब कभी तुम न बदले