Monday, June 15, 2020

तब समय देखने को घड़ी पहनते थे
अब घड़ी दिखाने को घड़ी पहनते हैं
कितने बदल गये हम कुछ बरसों में
अब खुशी नहीं,मुस्कराहट पहनते हैं

Tuesday, May 12, 2020

देख इतना संगदिल भी न था क़ातिल
छांव में रख गया मार के मुझे
तुम जालिम कह नाहक बदनाम न करो
उसने पानी भी पिलाया मार के मुझे
जुर्म मेरा मैं हँस दिया उसकी बात पर
वो मंद मंद मुस्कराया मार के मुझे
वो बादशाह है पर मेहरबां है बहुत
इमदाद का ऐलान भी किया मार के मुझे
जो उसे बेदर्द कहते हैं दुश्मन रहे होंगे
वो जार-जार खुल के रोया मार के मुझे

Tuesday, March 31, 2020

तुम क्या जानो उन शामों पे क्या गुजरी
तुमने तो बस बस्ती आना छोड़ दिया
इक जवानी है जो शोर मचाती आती है
इक बुढ़ापा है जो दबे पाँव आता है
इश्क़ में अक्सर गलत दवा की जाती है
मर्ज क्या है ? किसकी दवा की जाती है

Thursday, April 11, 2019


वो मेरी बेगुनाही से मुतमईन हो चला था
गुनाहगार साबित करगया मेराबारहा सफाईयां देना

मुद्दत हुई शहर में अब कहीं दिखता ही नहीं
वो एक शख्स जिसने रकम ली थी उधार में

Wednesday, February 27, 2019

देख तेरा पर्दा हमने कहाँ कहाँ न रखा 
पूछते हैं जब भी लोग "मुहब्बत की है ?"
हम भी मुस्करा के कह देते हैं
" ये मर्ज़ हमने न रखा "