Monday, December 14, 2015

कभी साथ न छोड़ने की कसम. .उठाई थी
बदनसीबी बड़ी दूर तलक साथ .... आई थी

Friday, September 18, 2015



सयानों ने पीढ़ी दर पीढ़ी समझाया
“ जा तो रहे हो उस के नगर
किसी चीज़ को भी छूना मत ”
बस यहीं मात खा गये
देखते देखते कहाँ से कहाँ आ गये
हर नई पीढ़ी आदम की गलती दोहराती है
ये हमारे डी.एन ए. में है
“ मैं अपनी गलती खुद करूंगा/करूंगी “
ये ज़िद हर इंसान की साईकी में है

Monday, August 24, 2015

तुम्हें पाने का सपना सच क्यों न हुआ ?
सुबह-सुबह का था, फिर सच क्यों न हुआ ?
सुनते हैं ज़िंदगी हर कदम जुआ है !

महज़ एक बाजी जीतने का सपना सच क्यों न हुआ