Monday, September 8, 2014

प्लास्टिक के लोग





प्लास्टिक का मग

प्लास्टिक का टब

प्लास्टिक का टूथ ब्रश

प्लास्टिक के जार

पॉलिथिन के मिल्क पॉउच

प्लास्टिक के बॉउल

में सुबह-शाम भोजन कर  

प्लास्टिक की बॉटल से

दिन रात पानी पी पी कर

हमारी सहन शक्ति  

हमारा सब्र

पॉलिथिन सा पतला

और नाज़ुक हो गया 
तो 
और
हम खुद प्लास्टिक हो गये 
तो

आश्चर्य कैसा ?

हैरत कैसी ?

दोस्तो ! ताज़्ज़ुब कैसा ?




Monday, July 21, 2014

कल की बात



                             



अभी कल की बात है
कल की ही सी तो बात है
हम बड़ों की एक्टिंग करते थे
बड़े होने की जल्दी थी
छोटे नहीं रहना चाहते थे
छोटे थे तो भी बड़ा दिखना चाहते थे
बड़ों की तरह सिगरेट
बड़ों की तरह बीयर
बड़ों की तरह फिल्में…. किताबें  
वो सब किताबें जो मना थीं
वो सब फिल्में जो मना थीं
फिर देखते देखते हम बड़े हो गये
और बड़े हो गये
बड़े होते होते बुढ़ा गये
और ये क्या बड़े बूढ़े हो गये
और अब हर कदमहर दम..हर चंद
कोशिश
छोटे होने की
छोटे दिखने की  

Tuesday, July 8, 2014

मेरा महबूब जादूगर है, मुझे गुमां था 
वो आज भी जवां है, कल भी जवां था

Tuesday, June 24, 2014

कल तलक मैं आंख का तारा था इस शहर में
आज कोई  पहचानता
नहीं मुझे इस शहर में
पहचान कर भी वो न पहचानने की तेरी अदाकारी
मजबूरी कभी इतनी तो ना थी मजबूर इस शहर में

Saturday, May 31, 2014



सालों बाद बीवी बना रही है मायके जाने का प्लान

अच्छे दिन आने वाले हैं 

टिकट कन्फर्म कराने को मैने लड़ा दी है जान 

अच्छे दिन आने वाले हैं

कब किसके यहां है कॉकटेल, कलैंडर पर लगा लिये हैं निशान

अच्छे दिन आने वाले हैं

Thursday, March 27, 2014



इतनी बढ़ी पानी की तिज़ारत मेरे शहर में

लोग बेचने लगे तरह तरह का पानी मेरे शहर में

तुम बोतल, जार टैंकरों पर ताज़्ज़ुब करते हो

देखो बिक रहा आंख का पानी मेरे शहर में

Monday, March 17, 2014

चीफ मिनिस्ट्री क्या गई, मफलर भी चला गया
भाषणबाजी न रही तो खांसी-खुर्रा भी चला गया
हे खग मृग तिलक-लेन विहारी जो छोड़ गया था सामान
देखा क्या तुमने ? अब तो वो ट्रक भी चला गया