हुक़्मरानों की तंज़ीम किस दौर में
आ ली दोस्तो किसी को 'सेकुलर'
कहना बन गया गाली दोस्तो हिंदु बड़ा है, न
मुसलमां दोस्तो बड़ी है तो इंसानियत और हिंदोस्तां दोस्तो
Wednesday, June 26, 2013
तुझे याद करना मेरे बस में नहीं तो तुझे भूलना मेरे बस में कैसे होता सोचता हूं तुमसे न मिला होता तो ? तुम तो 'तुम' ही रहते, बस मैं 'मैं' कैसे होता
एक
दुनियां छोड़ आये हम अपने पीछे एक दुनियां छोड़ आये तुम अपने पीछे अब इन तमाम सवालों के क्या मानी कौन आया ?............ किसके
पीछे ?
Wednesday, June 19, 2013
मतलबी, खुदगरज़, धोखेबाज़,ज़िंदगी कितने नामों से नवाज़ती ज़िंदगी शहर के कोलाहल में एक पगडंडीसी ज़िंदगी मेरी बस्ती से तेरे घर को आती ज़िंदगी मुहब्बत न थी कभी, न
सही, मेरा वहम ही सही अलबता मुझ पर अक्सर तरस खाती थी ज़िंदगी
Saturday, June 15, 2013
भले तुम उन्हें हीरे - जवाहरात कहो जानते तुम भी हो पत्थरों के सौदागर हो