Saturday, July 6, 2013

क्यों खो जाता हूं हर बार तेरी यादों के शहर में

क्यों खो जाता हूं हर बार तेरी यादों के शहर में
गो दिन-रात की आमदोरफ्त है अपनी

Friday, July 5, 2013

जो सबसे ज्यादा क़रीब हैं दिल के



जो सबसे ज्यादा क़रीब हैं दिल के
उनके खंज़र सबसे गहरे हैं दिल के

हुक़्मरानों की तंज़ीम किस दौर में आ ली दोस्तो



हुक़्मरानों की तंज़ीम किस दौर में आ ली दोस्तो
किसी को 'सेकुलर' कहना बन गया गाली दोस्तो
हिंदु बड़ा है, न मुसलमां दोस्तो
बड़ी है तो इंसानियत और हिंदोस्तां दोस्तो

Wednesday, June 26, 2013

तुझे याद करना मेरे बस में नहीं  
तो तुझे भूलना मेरे बस में कैसे होता  
सोचता हूं तुमसे न मिला होता तो ?  
तुम तो 'तुम' ही रहते, बस मैं 'मैं' कैसे होता


एक दुनियां छोड़ आये हम अपने पीछे
एक दुनियां छोड़ आये तुम अपने पीछे
अब इन तमाम सवालों के क्या मानी
कौन आया ?............ किसके पीछे ?




Wednesday, June 19, 2013



मतलबी, खुदगरज़, धोखेबाज़, ज़िंदगी
कितने नामों से नवाज़ती ज़िंदगी
शहर के कोलाहल में एक पगडंडी सी ज़िंदगी
मेरी बस्ती से तेरे घर को आती ज़िंदगी
मुहब्बत न थी कभी, न सही, मेरा वहम ही सही
अलबता मुझ पर अक्सर तरस खाती थी ज़िंदगी

Saturday, June 15, 2013

भले तुम उन्हें हीरे - जवाहरात कहो
जानते तुम भी हो पत्थरों के सौदागर हो