Saturday, June 15, 2013

भले तुम उन्हें हीरे - जवाहरात कहो
जानते तुम भी हो पत्थरों के सौदागर हो

Tuesday, June 11, 2013



मत पूछ मुझसे मेरे वस्ल की बात

हिज्र के शिकवों में गुजर गयी रात

जिंदगी लौटी मायूस उसकी गली से

बिन दुल्हन के जैसे लौट आये बारात
साहबजादे कान छिदवा के, टैटू गुदवा के, गाने लगे हैं रैप
टोका तो बोले "ओ कम ऑफ डैड, दिस इज जनरैशन गैप"

Monday, May 13, 2013



बात ही बात, कभी बेबात
मेरी बात बन गई.
औरों की खबर नहीं, आसानी से
मेरी बात बन गई.

आप नाहक ही अक़्ल लगाते रहे
क़रतब, तरक़ीबों में
कभी भोले, कभी बुद्धू बन
मेरी बात बन गई

जब से लगी दरख्तों के
काटने पर पाबंदी
पौधे उगाने के फ़न में
मेरी बात बन गई

ग़ैर मुल्क़ों में हमने
बटोरा सरमाया
आई वतन की याद, यहां भी
मेरी बात बन गई

अपनों ने इतने ज़ख्म दिये दोस्तो
इस दौर में नमक का  
सौदागर बन
मेरी बात बन गई

इकतरफा इश्क़ में हमनें उम्र जाया की
उनकी पड़ी अब नज़र हम पर
भले देर से सही, बननी थी सो
मेरी बात बन गई

मुस्करा के दिल के किवाड़
खोले हैं ज़िंदग़ी ने, उठ के गले मिलो
तुम ही क्यों रह जाओ, जब
मेरी बात बन गई

Tuesday, April 2, 2013



मेरा ये इसरार पहले प्यार
फिर वादाखिलाफियों का हिसाब
उनकी ये ज़िद-- पहले टूटे वादों का हिसाब
पिछला उधार साफ
फिर सोचेंगे--- हो न हो प्यार

Tuesday, March 26, 2013

सियासतदां मरते गये
मक़बरे बनते गये
और एक दिन मुल्क़ का मुल्क़
क़ब्रिस्तां में तब्दील हो गया

Tuesday, March 12, 2013

सुर्खी है आज हर एक अखबार में
आदमी का भाव गिर गया बाज़ार में
क़ब्र से लाशें चोरी होने लगीं
मुर्दे भी कहां महफूज़ रहे मज़ार में