Wednesday, April 19, 2023

बरसों मेरे मुसकाने के बाद 

वो भरे बाज़ार मुस्काए हैं 

रसम-ए-रोका भई वाह !

वो खूब निभाए हैं 

उम्र भर बस इक इसी 

ख्वाब ने परीशा रखा 

कभी ट्रेन छूट गई 

कभी रस्ता भुला गए 

न पैसा बड़ा है

न पैसा बड़ा है ।

न पद बड़ा है ।

मुसीबत में कोई ।

तेरे साथ खड़ा है 

तो तू सबसे बड़ा है ।