बरसों मेरे मुसकाने के बाद
वो भरे बाज़ार मुस्काए हैं
रसम-ए-रोका भई वाह !
वो खूब निभाए हैं
उम्र भर बस इक इसी
ख्वाब ने परीशा रखा
कभी ट्रेन छूट गई
कभी रस्ता भुला गए
न पैसा बड़ा है ।
न पद बड़ा है ।
मुसीबत में कोई ।
तेरे साथ खड़ा है
तो तू सबसे बड़ा है ।