Thursday, June 2, 2022
Monday, August 9, 2021
धुंआरा बनाम चिमनी
गाँव में मेरा एक कच्चा मकान था
कच्चे मकान की दीवार कच्ची थी
कच्ची दीवार से लगा कच्चा चूल्हा था
फूंकनी से चूल्हा फूंकती मेरी दादी
चूल्हे के नीचे छिपी एक हँडिया थी
जिस में राख़ इकट्ठा हुआ करती थी
वो राख़ दाँत माँजने के काम आती
शौच के बाद हाथ धोने के काम आती और बर्तन माँजने के काम आती
विम-बार, लिक्विड सोप और हज़ार नींबू की शक्ति बनने से
पहले
छत में एक धुंआरा होता था
छत पर उस धुंआरे को गोबर और
मिट्टी की परिधि से 'सेफ' क्या जाता था
ताकि बरसात में पानी चूल्हे पर न आए
यूं बारिश में धुंआरे को ढँकने को टिन लोहे या पॉलिथीन का
टुकड़ा होता था
अब बिजली की चिमनी चल गई हैं
डिजायनर्स चिमनी, महंगी बहुत
बहुत महंगी चिमनी
साठ हज़ार से लेकर दो लाख
और उससे ऊपर की चिमनी
जितने में पूरा एक कच्चा घर बन जाये
अब उससे भी ज्यादा की एक
अकेली बस चिमनी
वो भी कच्ची है, आपको ए.एम.सी. कराना
पड़ेगा
एक निश्चित लाइफ है उसकी
वो उससे भी कम है जितनी सेल्समैन इंगलिश में बता कर गया है
......मैं सोचता हूँ उस कच्चे मकान की कच्ची दीवार से सटे
कच्चे चूल्हे का कच्चा धुंआरा
कहीं अधिक पक्का था
जीवन भर...जीवन भर क्या
कई कई पीढ़ियों चला करता था
वो भी बिना ए. एम. सी. के
Saturday, May 29, 2021
Saturday, November 14, 2020
Friday, October 30, 2020
हम तो भूल जाने लगे थे
खोई दुनियां में आने लगे थे
अभी लोगों को पहचानने ही लगे थे