Thursday, July 16, 2015

aap ke lliye


My poetry rendition in RSC, Vadodara, now renamed NAIR year 2005-6

Tuesday, May 5, 2015

जादूगर का कहा " पलट के मत देखना " सच निकला
मैं पत्थर का हो गया जिस घड़ी तेरे कूँचे से निकला


तेरी मुहब्बत अज़ब शै रही जानम
न जीने देती है, न मेरा दम निकला 


तू ही बता कैसे यक़ीं करूं कि तेरी जुस्तजू तलाशे ज़िंदगी है
देखता हूं तेरी गली को जो निकला बांधे सर पे क़फन निकला
जादूगर का कहा 'पलट के मत देखना' सच हो गया.
मैं तेरे कूँचे से निकला और पत्थर का हो गया.



तेरी मुहब्बत भी क्या अज़ब शै रही जानम.. 
तुम दिख गए मर-मिटा ...तुम दिख गए जी उठा

तेरी जुस्तजू ! यक़ीनन तलाशे ज़िंदगी है
नज़रिया,
दिल, दर्द सभी कुछ तो जवां हो गया

Sunday, January 11, 2015

अच्छे दिन आने वाले हैं



सालों बाद बीवी बना रही है

मायके जाने का प्लान

अच्छे दिन आने वाले हैं



टिकट कनफर्म कराने को

मैंने लड़ा दी है जान

अच्छे दिन आने वाले हैं



कब किसके यहाँ है पार्टी-कॉकटेल

कलैंडर पर अभी से लगा लिये हैं निशान

अच्छे दिन आने वाले हैं



केबलवाला चुपचाप बता के गया था जो फिल्में


मैंने खरीद लिया है ‘इकॉनमी प्लान’

अच्छे दिन आने वाले हैं



कोई नहीं टोकने वाला

फिर से रोज पहननी है पजामे के ऊपर बनियान

अच्छे दिन आने वाले हैं



‘पानी बचाओ’ आंदोलन का हूं मैं कट्टर समर्थक

नहाने के केंसल सब प्रोग्राम

अच्छे  दिन  आने  वाले  हैं



सोफा, बैड, चेयर

सब पर बिखरी मिलेंगी पेंट-कमीजें एक समान

अच्छे दिन आने वाले हैं



फेंक देनी हैं मैंने सब शीशियां शुगर-फ्री की

खुल जायेगी घर में ही मिठाई की दूकान

अच्छे दिन आने वाले हैं



हर सेन्टेंस में ग़लती निकालने वाली

बेटी भी जा रही है साथ

मन-मर्ज़ी से होगा अब अंग्रेजी उच्चारन

अच्छे दिन आने वाले हैं


Friday, December 5, 2014



जरा सा वक़्त क्या गुजरा  

लोगों  ने चेहरे बदल दिये

  

जीत कैसे मिली ? ये खबर है मुझे !
नज़र फिरी, और उसने मोहरे बदल दिये



खामखाँ  दोस्ती का दम भरता रहा वो  

यहां मौसमो ने रिश्ते गहरे बदल दिये   

Tuesday, November 4, 2014



तारे-सितारे, ग्रह महूरत
  
सब तो मिलते थे

फिर मुहब्बत जाने कहाँ खो गयी
   
छत्तीस के छत्तीसों गुन 
   
सब तो मिलते थे

फिर मुहब्बत जाने कहाँ खो गयी
  
मेला मज़ार मंदिर तीरथ  

सब तो मिलते थे

फिर मुहब्बत जाने कहाँ खो गयी


वो हमसफर था तो रास्ते में क्यों उतर गया ????
अभी तलक तो यहीं था, न जाने किधर गया
दिल एक अज़ब भूल भुलैय्यां बस्ती है सनम
इक बार जो निकला, कभी न लौट के घर गया