Sunday, January 11, 2015

अच्छे दिन आने वाले हैं



सालों बाद बीवी बना रही है

मायके जाने का प्लान

अच्छे दिन आने वाले हैं



टिकट कनफर्म कराने को

मैंने लड़ा दी है जान

अच्छे दिन आने वाले हैं



कब किसके यहाँ है पार्टी-कॉकटेल

कलैंडर पर अभी से लगा लिये हैं निशान

अच्छे दिन आने वाले हैं



केबलवाला चुपचाप बता के गया था जो फिल्में


मैंने खरीद लिया है ‘इकॉनमी प्लान’

अच्छे दिन आने वाले हैं



कोई नहीं टोकने वाला

फिर से रोज पहननी है पजामे के ऊपर बनियान

अच्छे दिन आने वाले हैं



‘पानी बचाओ’ आंदोलन का हूं मैं कट्टर समर्थक

नहाने के केंसल सब प्रोग्राम

अच्छे  दिन  आने  वाले  हैं



सोफा, बैड, चेयर

सब पर बिखरी मिलेंगी पेंट-कमीजें एक समान

अच्छे दिन आने वाले हैं



फेंक देनी हैं मैंने सब शीशियां शुगर-फ्री की

खुल जायेगी घर में ही मिठाई की दूकान

अच्छे दिन आने वाले हैं



हर सेन्टेंस में ग़लती निकालने वाली

बेटी भी जा रही है साथ

मन-मर्ज़ी से होगा अब अंग्रेजी उच्चारन

अच्छे दिन आने वाले हैं


Friday, December 5, 2014



जरा सा वक़्त क्या गुजरा  

लोगों  ने चेहरे बदल दिये

  

जीत कैसे मिली ? ये खबर है मुझे !
नज़र फिरी, और उसने मोहरे बदल दिये



खामखाँ  दोस्ती का दम भरता रहा वो  

यहां मौसमो ने रिश्ते गहरे बदल दिये   

Tuesday, November 4, 2014



तारे-सितारे, ग्रह महूरत
  
सब तो मिलते थे

फिर मुहब्बत जाने कहाँ खो गयी
   
छत्तीस के छत्तीसों गुन 
   
सब तो मिलते थे

फिर मुहब्बत जाने कहाँ खो गयी
  
मेला मज़ार मंदिर तीरथ  

सब तो मिलते थे

फिर मुहब्बत जाने कहाँ खो गयी


वो हमसफर था तो रास्ते में क्यों उतर गया ????
अभी तलक तो यहीं था, न जाने किधर गया
दिल एक अज़ब भूल भुलैय्यां बस्ती है सनम
इक बार जो निकला, कभी न लौट के घर गया

Saturday, October 11, 2014

बीवी को खबर हो गयी, गर्ल फ्रेंड ने रखा है व्रत करवा चौथ का
मुझे नहीं लगता देख पाऊंगा अब मैं व्रत अगले करवा चौथ का
सब भूल गया मैं ! कैसे फल-फूल, कैसी पूजा आरती,
तुम्हें क्या खबर वो नाराज़ होती, तो कहाँ कहाँ बेलन मारती
उसने ले ली है सुपारी मेरे नाम की, दिन तय हुआ है अगले करवा चौथ का
उसका वादा है पहले तोड़ेगी वो मेरी गंजी चांद, और तब खोलेगी व्रत करवाचौथ का
अब जीऊँगा या मरूँगा अभी क्या खबर
देखना है किसका ज्यादा मारकेश है व्रत करवा चौथ का
चार दिन भी न चल पायी मेरी चाँदनी
भूख मर गई है, मैंने अभी से रख लिया है व्रत करवा चौथ का      
  

Monday, September 8, 2014

प्लास्टिक के लोग





प्लास्टिक का मग

प्लास्टिक का टब

प्लास्टिक का टूथ ब्रश

प्लास्टिक के जार

पॉलिथिन के मिल्क पॉउच

प्लास्टिक के बॉउल

में सुबह-शाम भोजन कर  

प्लास्टिक की बॉटल से

दिन रात पानी पी पी कर

हमारी सहन शक्ति  

हमारा सब्र

पॉलिथिन सा पतला

और नाज़ुक हो गया 
तो 
और
हम खुद प्लास्टिक हो गये 
तो

आश्चर्य कैसा ?

हैरत कैसी ?

दोस्तो ! ताज़्ज़ुब कैसा ?