Tuesday, July 26, 2011

उम्र काट दी hamne इसी हसरत में

वो मिलने आएँगे पहली फुरसत में

Thursday, July 7, 2011

मेरा ही खंजर

मेरे सीने में

उतार दिया.

आज उस ने

मेरा कर्ज़

उतार दिया.

तू जिये हज़ारों साल

तुझ पे अपनी जान का

सदका हमने

उतार दिया.

सियासत में शराफत

ढूँढते हो

यहाँ सबने अपना पानी

उतार दिया.

हासिल थी सभी नियामतें

फिर राज़ क्या है ? क्यूँ उसने

अपने भाइयों को मौत के घाट

उतार दिया.

हम अलमस्त रहे

अमीरी हो कि फकीरी

गो एक चोला पहना तो दूसरा

उतार दिया.

ज़िंदगी मेरे पास सही टिकट था सफर का

फिर क्यों कर आधी रात

मुझे जंगल में

उतार दिया.

Friday, July 1, 2011

नशे का कुछ तो ख्याल कर

पी के तो सच बोला कर.

जब न सोते बने, न रोते

करवट-करवट हर रात की सुबह कर.

मरीज़-ए-इश्क़ है

फिलहाल ईज़ाद नहीं इलाज़

कुछ दिन हँसी-खुशी से

गुज़र जाएँ बस इतनी सी दुआ कर.

Monday, June 6, 2011

Thursday, May 26, 2011

तेरे सीने से न सही

मेरे सीने से सही

मगर दिन-रात

उठता है धुआँ.


तक़दीर हम दोनों की

एक सी हमदम

मेरी खुशी धुआँ

तेरा ग़म धुआँ.


ये नसीब का सारा

खेल है ऐ दोस्त

अमीर मरे तो धुआँ

गरीब जिये तो धुआँ.


पिया क्या सिधारे परदेस

रात भर रोती रहीं आँखें

गीली लकड़ियाँ देर तक

देती रहीं धुआँ.


अश्कबार नज़रें यूँ भी

ना देख पातीं

मंजर तेरी जुदाई का

शुक्र है बन के गुबार,दरमियाँ आ गया धुआँ.


इश्क़ की थाह पा सके

ज़माने के बस की बात नहीं

जहाँ तक नज़र जायेगी

पाओगे मुहब्बतों का धुआँ.

Thursday, April 28, 2011

उनके होटों पे सौ सौ ताले
और अपनी चाबी भूल जाने की आदत पुरानी.
कौन जतन रूठी ज़िन्दगी मनाएं
खुशियों की हमसे अदावत पुरानी.
मुहब्बत उनकी तिजारत,
मुहब्बत हमारी ज़ियारत
उनकी शिकायत पुरानी,
हमारी मुहब्बत पुरानी

Tuesday, April 26, 2011

मेरे चेहरे पे हमेशा जो
एक मुस्कान सी लगती है.
बचपन में लगी चोट है जो
एक मुस्कान सी लगती है.


उनसे मुलाक़ात ज़रूर
खुशी की बात होगी
जो भी मिल कर गया, चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है

ये राज़ आवाम जान नहीं पाया
नेता जीते या हारे,
चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है

साकी आज तू भी दो घूंट ले
मैं जब भी पीता हूँ
तेरे चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है

महज़ इतना कहा था
'कल से नहीं पीऊँगा'
महफिल में सभी के चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है