Friday, July 1, 2011

नशे का कुछ तो ख्याल कर

पी के तो सच बोला कर.

जब न सोते बने, न रोते

करवट-करवट हर रात की सुबह कर.

मरीज़-ए-इश्क़ है

फिलहाल ईज़ाद नहीं इलाज़

कुछ दिन हँसी-खुशी से

गुज़र जाएँ बस इतनी सी दुआ कर.

Monday, June 6, 2011

Thursday, May 26, 2011

तेरे सीने से न सही

मेरे सीने से सही

मगर दिन-रात

उठता है धुआँ.


तक़दीर हम दोनों की

एक सी हमदम

मेरी खुशी धुआँ

तेरा ग़म धुआँ.


ये नसीब का सारा

खेल है ऐ दोस्त

अमीर मरे तो धुआँ

गरीब जिये तो धुआँ.


पिया क्या सिधारे परदेस

रात भर रोती रहीं आँखें

गीली लकड़ियाँ देर तक

देती रहीं धुआँ.


अश्कबार नज़रें यूँ भी

ना देख पातीं

मंजर तेरी जुदाई का

शुक्र है बन के गुबार,दरमियाँ आ गया धुआँ.


इश्क़ की थाह पा सके

ज़माने के बस की बात नहीं

जहाँ तक नज़र जायेगी

पाओगे मुहब्बतों का धुआँ.

Thursday, April 28, 2011

उनके होटों पे सौ सौ ताले
और अपनी चाबी भूल जाने की आदत पुरानी.
कौन जतन रूठी ज़िन्दगी मनाएं
खुशियों की हमसे अदावत पुरानी.
मुहब्बत उनकी तिजारत,
मुहब्बत हमारी ज़ियारत
उनकी शिकायत पुरानी,
हमारी मुहब्बत पुरानी

Tuesday, April 26, 2011

मेरे चेहरे पे हमेशा जो
एक मुस्कान सी लगती है.
बचपन में लगी चोट है जो
एक मुस्कान सी लगती है.


उनसे मुलाक़ात ज़रूर
खुशी की बात होगी
जो भी मिल कर गया, चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है

ये राज़ आवाम जान नहीं पाया
नेता जीते या हारे,
चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है

साकी आज तू भी दो घूंट ले
मैं जब भी पीता हूँ
तेरे चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है

महज़ इतना कहा था
'कल से नहीं पीऊँगा'
महफिल में सभी के चेहरे पे
एक मुस्कान सी लगती है

Friday, March 18, 2011

वादा कर गए थे इन रोती आँखों से, वो आयेंगे,
मौसम सुहाने मेरी बस्ती में, तब से नहीं आते
तुम्हें मेरी गूँगी आँखों का वास्ता, चले भी आओ
अब तो आँसू भी मेरी आँख में कब से नहीं आते

Thursday, November 4, 2010

कुछ गज़ब नहीं होता

कोई अजब नहीं होता
कुछ गज़ब नहीं होता
कमाल है अब किसी बात पर
ताज्जुब नहीं होता

अपने बुजुर्ग की हत्या
जिगर के टुकड़े की बलि
पत्थरों के शहर में अब किसी को
दुःख नहीं होता

कैसे चले दूकान
आईनों की, अंधों के शहर में
क्या हैरत गर किसी का इधर
रुख नहीं होता

मर जायेंगे तुम्हारे बगैर
जी न पाएंगे तुम्हारे बगैर
सच है, मगर बार बार ये दोहराना
शुभ नहीं होता