मुझसे काम याद आ रहे
उन्हें बार बार
हाल पूछा जा रहा है मेरा
दिन में बार बार
वक़्त-ए-रुखसत क़ासिद ने दिया
तेरा बंद लिफाफा
'ना' होगी ये सोच उम्र भर खोला नहीं
तेरा बंद लिफाफा
यूं सारे गवाहो-सुबूत मेरे हक़ में थे
मुंसिफ़ पलट गया देख अदालत में
तेरा बंद लिफाफा
तक़दीर हम दोनों की एक सी हमदम
मेरा मुकद्दर ना खुला और ना खुला
तेरा बंद किफ़ाफ़ा
प्रश्न तो फिर प्रश्न है उत्तर देना ज़रूरी है
लोकशाही है तो उसे स्वर देना ज़रूरी है
कानून के आगे यकीनन बराबर हैं
क्या फकीर ? क्या शाह ?
ये बात है तो ऐसा नज़र आना ज़रूरी है
रवानी हो खून में तो सीने का माप नहीं देखा जाता
सारस से दर जाते हैं ये दौर कागजी शेरों का है
तुम बहादुर हो तो बहादुरी का मुजाहरा ज़रूरी है
सियासत का सियाह चेहरा बेनकाब सबके सामने
तुमने खत्म कीं रिवायतें मुरव्वतें तमाम
तुम्हारी आँख का पानी मर चला तो क्या
इक आईना आवाम की आँखों में है
वक़्त आ गया सियासत को आईना दिखाना ज़रूरी है
गाँव में मेरा एक कच्चा मकान था
कच्चे मकान की दीवार कच्ची थी
कच्ची दीवार से लगा कच्चा चूल्हा था
फूंकनी से चूल्हा फूंकती मेरी दादी
चूल्हे के नीचे छिपी एक हँडिया थी
जिस में राख़ इकट्ठा हुआ करती थी
वो राख़ दाँत माँजने के काम आती
शौच के बाद हाथ धोने के काम आती और बर्तन माँजने के काम आती
विम-बार, लिक्विड सोप और हज़ार नींबू की शक्ति बनने से
पहले
छत में एक धुंआरा होता था
छत पर उस धुंआरे को गोबर और
मिट्टी की परिधि से 'सेफ' क्या जाता था
ताकि बरसात में पानी चूल्हे पर न आए
यूं बारिश में धुंआरे को ढँकने को टिन लोहे या पॉलिथीन का
टुकड़ा होता था
अब बिजली की चिमनी चल गई हैं
डिजायनर्स चिमनी, महंगी बहुत
बहुत महंगी चिमनी
साठ हज़ार से लेकर दो लाख
और उससे ऊपर की चिमनी
जितने में पूरा एक कच्चा घर बन जाये
अब उससे भी ज्यादा की एक
अकेली बस चिमनी
वो भी कच्ची है, आपको ए.एम.सी. कराना
पड़ेगा
एक निश्चित लाइफ है उसकी
वो उससे भी कम है जितनी सेल्समैन इंगलिश में बता कर गया है
......मैं सोचता हूँ उस कच्चे मकान की कच्ची दीवार से सटे
कच्चे चूल्हे का कच्चा धुंआरा
कहीं अधिक पक्का था
जीवन भर...जीवन भर क्या
कई कई पीढ़ियों चला करता था
वो भी बिना ए. एम. सी. के
हम तो भूल जाने लगे थे
खोई दुनियां में आने लगे थे
अभी लोगों को पहचानने ही लगे थे